राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया अपना शताब्दी वर्ष

मुख्य वक्ता क्षेत्र संपर्क प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वयंसेवक मनोज जी ने महेंद्र इंटर कॉलेज के मैदान में गणवेशधारी स्वयंसेवकों के सामने अपने विचार व्यक्त किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया अपना शताब्दी वर्ष
  • महर्षि अरविंद के विचारों को सच साबित करने में लगे 100 वर्ष : मनोज जी 
  • बैंड बाजों के धुन पर कदम ताल करते सड़कों पर धूमधाम से किया पथ संचालन 
  • करीब 8 किलोमीटर के नगर भ्रमण में जगह-जगह पर पथ संचालन करने वाले स्वयंसेवकों के ऊपर नागरिकों ने की पुष्प वर्षा 
 जयराम राय, जिला संवाददाता / चंदौली। कुछ बात है कि हस्ती मिट्टी नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन सारे जहां हमारा। .. इस बात में इतनी सच्चाई थी की महर्षि अरविंद के विचार को राष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने घर-घर पहुंचा कर ही दम लिया। छुआछूत को मिटाना ही अब हमारे लिए एक चुनौती बन चुकी है. हम किसी भी सूरत में छुआछूत को मिटा कर ही रहेंगे। हमने अपनी सनातनी परंपरा को मिटने नहीं दिया। मिटाने के लिए लोगों ने हमको हर तरह से मिटाने की कोशिश की लेकिन एक अदृश्य शक्ति है जो हमारी शक्तियों को यह सांसों को मिटने नहीं दिया।

 उक्त बातें अपने संबोधन में मुख्य वक्ता क्षेत्र संपर्क प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वयंसेवक मनोज जी ने महेंद्र इंटर कॉलेज के मैदान में गणवेशधारी स्वयंसेवकों के सामने अपने विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद ने सीधा पांच प्रण की प्रतिज्ञा का बोध कराया था और इस पांच प्रण के साथ हम आगे बढ़ते हुए चल रहे हैं। जिसमें राष्ट्र प्रथम का भाव प्रमुख रूप से है। 


लेकिन पांच प्रण जो है उसमें पहला है सामाजिक समरसता, दूसरा है परिवार का भाव तीसरा है स्व का भाव यानी स्वदेशी का भाव चौथा है पर्यावरण का संरक्षण इसमें प्रकृति में हो रहे तमाम विघटन को रोकना  तथा  पांचवां समाज के नियम कानून का पालन करना।

इस प्रकार के प्राण को लेकर कुछ लोग दो चार पांच लोग महर्षि जी के विचारों को आत्मसात करते हुए अपने-अपने गांव में भ्रमण करते रहे करते करते 100 वर्षों में 50 देश में हमारे विचार प्रचारित हो गए संघ के विचारों से प्रभावित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जो भी कर्मयोगी रहा किसी भी देश में गया संघ के विचारों को वहां पर अपना विचार प्रकट करना शुरू किया। 


उनके विचार को सुनकर दूसरे लोगों ने अनुसरण करना शुरू किया तब समझ में आया कि महर्षि अरविंद ने यह कहा था कि आप परेशान मत होना आप का देश आजाद होगा इसमें दो राय नहीं एक अदृश्य शक्ति है।जो आजाद करने के लिए आप के साथ है। लेकिन आप को काम करना होगा ।

उसको यह साबित करना होगा कि यह हमारे भारतीय जो सनातन परंपरा को कायम करने के लिए कटिबद्ध है ।उनको भी इस कठिन काम में कठिनाई से पेश होना होगा बाकी कार्य तो मेरा है मुझे तो करना ही है। इस प्रकार से संबोधन करते हुए मनोज जी ने गण वेशधारी स्वयंसेवकों को बहुत ही शालीनता से अपने उच्च कोर्ट के विचार प्रकट करना होगा। 

प्रकृति के संरक्षण के लिए उन्होंने पांच पेड़ों का नाम लिया जिसमें पीपल,बरगद पकड़ी,नीम गुलर इत्यादि इन पेड़ों ने 24 घंटे ऑक्सीजन देने का कार्य प्रकृति ने अपने स्तर से भेजा है महर्षियों ने इस रहस्य को बहुत पहले जान लिया था कि बिना ऑक्सीजन से  जीवन जीना दूभर होगा ऐसी स्थिति में हमें इन पांच पेड़ों को बचाना आवश्यक है।


स्वयंसेवक जब भी प्रकृति के संरक्षण के लिए निकलते हैं उनके हाथों में पांच पेड़ों में से कोई न कोई पेड़ जरूर ले कर लगाते हैं और जहां जाते हैं जिस जगह पर जाते हैं अपनी छाप छोड़ते हैं आज इतने छोटे छोटे स्वयंसेवकों ने हमारा दिल जीत लिया है आज यही जो छोटे छोटे बच्चे दिखाई दे रहे हैं यही बच्चे आगे चलकर बहुत बड़े वृक्ष का रूप ले लेंगे। आज यहां करीब 85 वर्ष के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता गणवेश में दिखाई दे रहे हैं.


 मुझे बहुत ही खुशी हो रही है कि जब आराम करने का दिन है तो भी लंगड़ाते हुए अपने मूल वेश में राष्ट्र प्रथम के नाम पर सनातन की परंपरा को बचाने के उद्देश्य से अपने आप को संघ में विलीन होता दिखाई दे रहे हैं, ऐसी स्थिति में उनके भाव को यह साबित करने में समय नहीं लग रहा है कि-तेरा वैभव बना रहे मां मेरा क्या दिन चार रहे।

सलीके से पथ संचलन तथा मृदुल स्वभाव बातचीत करने का जो लहजा एकदम नरम, किसी तरह का कोई घमंड नहीं,इन स्वयं सेवकों के माथे पर विश्वास का भाव, शांति का भाव,  दिखाई पड़ता था। 

इनका अनुशासन तथा सड़कों पर चलने के तरीके को देखने के लिए पूरे नगर के लोग एक दूसरे के धक्का मुक्की करते हुए दिखाई दे रहे थे।गजब का पद संचलन था सच में शताब्दी वर्ष या यूं कहा जाए तो अमृत काल सच साबित हो रहा था।

इस अवसर पर गुलाब सिंह, राज किशोर पोद्दार,जयप्रकाश, नंदलाल लक्ष्मी नारायण सिंह,डॉक्टर अनिल यादव, दीपक सिंह,अमरनाथ, अनिल जी प्रमुख रूप से रहे. अध्यक्षता बृजेश कुमार पांडे तथा संचालन सतीश जी ने किया


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