US और ईरान के बीच तनाव के बीच आज सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई। इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने के भाव $5,000 के निशान से नीचे आ गए।
MCX पर सोने और चांदी के लेटेस्ट भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने और चांदी दोनों की चमक फीकी पड़ गई। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 1,800 रुपये (1.14%) गिरकर 156.655 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। चांदी का हाल और भी बुरा रहा। मई डिलीवरी वाली चांदी के भाव 4,300 रुपये (1.7%) से ज़्यादा गिर गए। इस गिरावट से चांदी की कीमत 2,551,011 रुपये प्रति kg हो गई।
इंटरनेशनल मार्केट में उथल-पुथल
ग्लोबल मार्केट में भी सोने की कीमतों पर दबाव है। सिंगापुर में स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर US$4,986.34 प्रति औंस पर आ गया। यह गिरावट इसलिए बड़ी है क्योंकि सोना अब अपने साइकोलॉजिकल लेवल $5,000 से नीचे है। चांदी भी गिरकर US$80.03 पर आ गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम के रेट भी कम हुए। कीमतें क्यों गिर रही हैं?
इंटरेस्ट रेट वॉर एंड गेम
सोने की कीमतों में इस उतार-चढ़ाव के पीछे दो मुख्य कारण हैं। इंटरेस्ट रेट में कटौती की उम्मीदें खत्म हो गई हैं – इन्वेस्टर्स को उम्मीद थी कि US फेडरल रिजर्व जल्द ही इंटरेस्ट रेट में कटौती करेगा, लेकिन अब यह संभावना लगभग खत्म हो गई है। जब इंटरेस्ट रेट ऊंचे रहते हैं, तो सोने जैसे नॉन-इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स की डिमांड कम हो जाती है।
US और ईरान और कच्चे तेल के बीच तनाव
मिडिल ईस्ट में युद्ध अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। हाल ही में, US ने ईरान के तेल एक्सपोर्ट हब पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने अरब देशों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है।
सरकार ने इंपोर्ट टैरिफ पर राहत दी
आम नागरिक और ज्वैलर्स के लिए भी कुछ राहत है। केंद्र सरकार ने सोने की बेस इंपोर्ट कीमत कम कर दी है। नए टैरिफ के साथ, सोने की बेस कीमत US$1,664 से घटाकर US$1,652 प्रति 10 ग्राम कर दी गई है। इससे इंपोर्टर्स की लागत कम होगी और घरेलू बाज़ार में सोने की कीमतें स्थिर हो सकती हैं। हालांकि, चांदी के लिए बुरी खबर है। सरकार ने चांदी की बेस इंपोर्ट कीमत $2,800 से बढ़ाकर $2,820 प्रति kg कर दी है, जिससे कीमत और बढ़ सकती है।
क्या सोना और गिरेगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हफ़्ते की फेडरल रिजर्व मीटिंग अहम होगी। अगर ब्याज दरें कम नहीं की गईं, तो सोने पर दबाव बना रहेगा। हालांकि, यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए अच्छा समय हो सकता है, क्योंकि स्टैगफ्लेशन (मंदी और महंगाई) के दौरान सोने को हमेशा एक सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है।
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