गौशाला और बायोगैस प्लांट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के मिलेंगे अवसर : DM Chandauli

जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग द्वारा पीडीडीयू नगर तहसील स्थित ग्राम एकौनी में गौशाला का भ्रमण किया गया।

गौशाला और बायोगैस प्लांट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के मिलेंगे अवसर


  • यह परियोजना आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण, अन्य गौशाला के गांवों में भी ऐसे प्लांट लगाने की योजना पर होगा कार्य

चंदौली। जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग द्वारा पीडीडीयू नगर तहसील स्थित ग्राम एकौनी में गौशाला का भ्रमण किया गया।भ्रमण के दौरान किसान चन्द्र प्रकाश द्वारा गौशाला का संचालन किया जा रहा है, जिलाधिकारी के भ्रमण के दौरान किसान चन्द्र प्रकाश ने बताया कि गौशाला में लगभग 200 गाय रखी गई है और उनके दूध की बिक्री की जाती है।

किसान के द्वारा गौशाला परिसर में बायोगैस का प्लांट भी बनाया गया है, जिससे लगभग 120 घरों में पाईप लाइन के माध्यम से गैस की सप्लाई दी जा रही है। 

इस कार्य को देख जिलाधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए और कार्य क्षेत्र का बड़े पैमाने पर करने को कहा। उन्होंने नावार्ड एवं उद्योग अधिकारी को सरकार द्वारा वित्तीय सहायता का लाभ दिलाकर योजनाओं से जोड़ा जाय ताकि बायोगैस एवं पशुपालन के क्षेत्र में विस्तार हो सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि इस कार्य को और बेहतर करने के लिए किसी विभाग से अगर किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता पड़े तो बिना हिचक के हमे अवगत कराए हम पूरा सहयोग करेंगे।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साईं से कहा जनपद में जितने गौशालाएं है वहां पर भी इसी प्रकार से बायोगैस प्लांट लगाए जिससे अधिक से अधिक लोगों इसकी सुविधा मिल सके साथ ही किसानों को आर्गेनिक फर्टिलाइजर प्राप्त होगी जिससे उनके फसलों की गुणवत्ता के साथ साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

चंद्रप्रकाश सिंह द्वारा संचालित गौशाला और बायोगैस प्लांट आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गए हैं। 200 गायों के गोबर से चलने वाला यह प्लांट 350 क्यूबिक मीटर क्षमता का है, जिससे 125 घरों में पाइपलाइन द्वारा मात्र ₹500 महीने में सस्ती और नियमित बायोगैस मिल रही है। यह पहल एलपीजी संकट का समाधान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।


गौशाला और बायोगैस प्लांट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के मिलेंगे अवसर


युवा उद्यमी चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि पाइपलाइन से सीधे घर-घर में गैस की सप्लाई पहुंचने से ग्रामीणों को लगभग ₹500 प्रति माह में गैस मिल जाती है, जो एलपीजी सिलेंडर की तुलना में लगभग आधी है।
उन्होंने बताया कि 120 से अधिक घरों को सुबह-शाम नियमित गैस की आपूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि पशुपालन से लगभग 3000 किलो गोबर का दैनिक उपयोग करके बिजली और बायोगैस का उत्पादन किया जा रहा है, जो पहले बेकार जाता था।

जिलाधिकारी ने कहा यह परियोजना आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण है, जिससे प्रभावित होकर अन्य गांवों में भी ऐसे प्लांट लगाने की योजना बन रही है। गौशाला और बायोगैस प्लांट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इस दौरान उप जिलाधिकारी पी डी डी यू नगर,जिला पूर्ति अधिकारी तहसीलदार पी डी डी यू नगर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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