भारत सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद के किसानों को आधुनिक और सतत कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल की जा रही है।
- विशेषज्ञों द्वारा मिलेगा प्रशिक्षण, लाइव डेमो से सीखेंगे किसान
- जनपद के उत्कृष्ट किसानों का अनुभव और विभागीय स्टॉल से मिलेगी महत्वपूर्ण जानकारी
चंदौली। भारत सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद के किसानों को आधुनिक और सतत कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल की जा रही है। आगामी 18 और 19 जून, 2026 को कृषि विज्ञान केन्द्र, चन्दौली में दो दिवसीय 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का भव्य आयोजन किया जाएगा।
उप कृषि निदेशक भीमसेन ने जनपद के समस्त किसान भाइयों को इस आयोजन की जानकारी देते हुए इसमें बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने की अपील की है।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां और गुर साझा किए जाएंगे।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण व्यावहारिक प्रशिक्षण होगा, जिसमें किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निम्नलिखित जैविक घटक मौके पर ही बनाकर दिखाए जाएंगे:-
- बीजामृत (बीज शोधन के लिए)
- जीवामृत (मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए)
- घनजीवामृत
उप कृषि निदेशक ने कहा प्रशिक्षण में खास बात यह रहेगा कि किसान भाई इन्हें बनाने की विधि को लाइव देखकर सीख सकेंगे, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के स्वयं अपने घर पर इन्हें तैयार कर सकें और खेती की लागत को कम कर सकें।
इस कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य करने वाले प्रगतिशील किसान भी शामिल होंगे, जो उपस्थित जनसमुदाय के साथ अपने जमीनी अनुभवों को साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त, कार्यशाला परिसर में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ किसानों को 'समेकित जन कल्याण' एवं 'जन-जागरूकता' से जुड़ी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
उप कृषि निदेशक ने अपील किया कि "जनपद के सभी किसान भाई दिनांक 18 व 19 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे कृषि विज्ञान केन्द्र, चन्दौली में समय से पहुँचकर इस कार्यशाला का हिस्सा बनें। विशेषज्ञों की राय और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।"

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