जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह पर पत्रकारों के साथ ही भाजपा नेता ने बड़ा आरोप लगाया है।
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| चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह पर बड़ा आरोप |
चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह का मीडिया के प्रति बेहद अड़ियल और आक्रामक रुख देखने को मिला। आरोप है कि सांसद ने न केवल मीडिया को बैठक से दूर रखने का फरमान सुनाया, बल्कि पत्रकारों के पूछने पर बेहद अहंकार भरे लहजे में कह दिया, "हमें मीडिया की कोई जरूरत नहीं है, हमारा क्या बिगड़ेगा!"
बंद कमरे की सियासत: DM को दिया सख्त निर्देश
मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट सभागार में दिशा (DISHA) की उच्च स्तरीय बैठक शुरू होने से ठीक पहले सांसद वीरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी (DM) चंद्र मोहन गर्ग को बेहद सख्त और कड़े लहजे में निर्देशित किया था कि मीडियाकर्मियों को सभागार के भीतर प्रवेश न दिया जाए।
सांसद ने इसके पीछे अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा:
"सभागार के अंदर पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। बैठक के दौरान अक्सर तीखी बहस होती है और लोग एक-दूसरे के खिलाफ गलत शब्दों का प्रयोग भी कर बैठते हैं। मीडिया वहां लाइव कवरेज के लिए तैयार रहती है, जिससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है और हमारे ऊपर बहुत बड़ा मानसिक दबाव (प्रेशर) बनता है।"
BJP नेता सूर्यमुनि ने सपा सांसद वीरेंद्र सिंह पर निशाना साधा: दिशा मीटिंग से पत्रकारों को बाहर रखने का किया विरोध , कहा, "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का सम्मान करना बहुत ज़रूरी "
BJP Leader सूर्यमुनि तिवारी चंदौली जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की मीटिंग से पत्रकारों को बाहर रखने का मुद्दा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। BJP नेता और सकलडीहा से दो बार विधान सभा का चुनाव लड़ चुके सूर्यमुनि तिवारी ने सपा सांसद पर निशाना साधते हुए इस मुद्दे को लोकतंत्र और प्रेस की आज़ादी के खिलाफ बताया।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को पत्रकारों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और लोगों की आवाज़ सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।सूरमुनि तिवारी ने कहा कि डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का रिव्यू करने और जनता के मुद्दों पर चर्चा करने वाली मीटिंग्स में ट्रांसपेरेंसी बहुत ज़रूरी है। इन मीटिंग्स की जानकारी जनता तक पहुंचाकर वे लोकतांत्रिक सिस्टम को मज़बूत करते हैं। इसलिए उन्हें ऐसी मीटिंग्स से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और मीडिया के बीच एक हेल्दी बातचीत होनी चाहिए। पत्रकारों को उनके काम करने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के हिसाब से नहीं माना जा सकता।पूर्व केंद्रीय मंत्री और चंदौली के पूर्व सांसद महेंद्र नाथ पांडे के कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए, BJP नेता ने कहा कि उन्होंने हमेशा पत्रकारों का सम्मान किया और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया। उनके कार्यकाल में मीडिया और जनप्रतिनिधियों के बीच एक अच्छी बातचीत होती रही।सूर्यमुनि तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधि आलोचना से बचने के लिए पत्रकारों को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है और इससे पारदर्शिता पर असर पड़ता है।उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और पत्रकारों को अपनी पेशेवर ज़िम्मेदारियां निभाने में रुकावट न आए। उन्होंने कहा कि BJP ने हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन किया है।
सांसद के इस "प्रेशर" से बचने के लिए जिलाधिकारी ने भी उनके मौखिक आदेश का पालन किया और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की कवरेज से पूरी तरह महरुम कर दिया गया।
बैठक के बाद पत्रकारों का फूटा गुस्सा
असली ड्रामा बैठक समाप्त होने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिला। नियमानुसार जब बैठक खत्म हुई, तो कुछ पत्रकार आदतन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सांसद वीरेंद्र सिंह से बैठक के फैसलों पर 'बाइट' (प्रतिक्रिया) लेने के लिए उनके आगे माइक लगाने लगे।
तभी वहां मौजूद अन्य सजग पत्रकारों ने इस पर आपत्ति जताई और अपने साथी पत्रकारों को रोकते हुए कहा, "ऐसी बाइट का क्या मतलब? जब माननीय सांसद जी ने मीटिंग हॉल में जिलाधिकारी से साफ कह दिया है कि मीडिया को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा, तो अब किस बात की कवरेज?"
पत्रकारों के इस सामूहिक विरोध और आत्मसम्मान को देखकर सांसद वीरेंद्र सिंह असहज होने के बजाय और बिदक गए। उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने बेहद तल्ख लहजे में कहा: "हमको भी तुम्हारी (मीडिया की) कोई जरूरत नहीं है। हमारा क्या बिगड़ेगा!"
यह कहते हुए सांसद वीरेंद्र सिंह अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रफूचक्कर हो गए। सांसद के इस अड़ियल बयान के बाद वहां मौजूद पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा गया।
जनमानस के मताधिकार का खुला दुरुपयोग और अपमान
दिशा की बैठक कोई गुप्त या व्यक्तिगत बैठक नहीं होती। यह जिले के विकास, जनता की समस्याओं, बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों की समीक्षा का सरकारी मंच है। जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है, वे वहां क्या कर रहे हैं, यह जानने का हक हर नागरिक को है। मीडिया इसी हक की आवाज बनती है।
स्थानीय प्रबुद्ध जनों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद वीरेंद्र सिंह ने न केवल मीडिया को अपमानित किया है, बल्कि चंदौली की उस आम जनता की भावनाओं को भी पैरों तले रौंदा है, जिन्होंने भारी उम्मीदों के साथ उन्हें अपना कीमती वोट देकर संसद भेजा। जनता के सवालों से भागना और मीडिया को प्रतिबंधित करना साफ़ दर्शाता है कि जनप्रतिनिधि के पास जनता को दिखाने के लिए कोई ठोस काम या जवाब नहीं है।
जिले के पत्रकार संगठनों में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
सांसद के इस तानाशाही रवैये के बाद चंदौली के पत्रकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पत्रकारों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि ही जनता और मीडिया से मुंह चुराने लगेंगे, तो लोकतंत्र का क्या होगा? सोशल मीडिया पर भी सांसद के इस बयान की जमकर थू-थू हो रही है। पत्रकार यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सांसद ने अपने इस अमर्यादित व्यवहार और बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद नहीं जताया, तो जिले के सभी पत्रकार उनके कार्यक्रमों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।


