परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लेटलतीफी पर सख्त हुए ; बीएसए चंदौली

जिले के बीएसए सचिन कुमार ने कई विद्यालयों से मिली शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि नए सत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लेटलतीफी पर सख्त हुए ; बीएसए चंदौली

  • जनपद में परिषदीय विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 
  • आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में निर्धारित समय के बाद तक लटकते रहे ताले 
चंन्दौली : जनपद में परिषदीय विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिक्षकों की लगातार लेटलतीफी और नौनिहालों की शिक्षा में लापरवाही को लेकर अब बेसिक शिक्षा विभाग सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है।

लगातार मिल रही शिकायतें
ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचनाओं के अनुसार जनपद के आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में निर्धारित समय के बाद तक ताले लटकते रहे और शिक्षक देर से पहुंचे। कई जगहों पर बच्चे गेट के बाहर इंतजार करते देखे गए।

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लेटलतीफी पर सख्त हुए ; बीएसए चंदौली

 प्रमुख मामले ये रहे :-
 
1 -कम्पोजिट विद्यालय मुडहुआ दक्षिणी (30 मार्च)
निर्धारित समय के बाद तक विद्यालय बंद रहा, बच्चे बाहर इंतजार करते रहे, शिक्षक देर से पहुंचे।
2 -प्राथमिक विद्यालय मुसाहिपुर (25 मार्च)
सुबह 9:20 बजे तक कोई शिक्षक मौजूद नहीं।
3 -प्राथमिक विद्यालय डबरीकला (24 मार्च)
निर्धारित समय के बाद भी शिक्षक अनुपस्थित।
4 -कम्पोजिट विद्यालय सीतापुर (26 फरवरी)
सुबह 9:30 बजे तक कोई शिक्षक नहीं पहुंचा।
5-कम्पोजिट विद्यालय जोगिया कला (25 मार्च)
समय के बाद भी विद्यालय में शिक्षक नहीं मिले।
6 -पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोदोचक (1 अप्रैल)
सुबह 8:15 बजे तक विद्यालय में ताला बंद रहा।
7- उच्च प्राथमिक विद्यालय साडाडीह (7 अप्रैल)
सुबह 8:15 बजे तक शिक्षक नदारद रहे।
गौरतलब हो कि इन सभी मामलों में स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं, लेकिन कार्यवाही शून्य रहने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता गया।

 बीएसए ने सख्त किया रुख, 
 इस मामले में बीएसए चंदौली ने स्पष्ट किया है कि—सभी मामलों की जांच कराई जाएगी और सभी दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगीनए सत्र में लेटलतीफी की शिकायत मिलने पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा 

देखना है आगे क्या होता है ?
लगातार सामने आ रही लापरवाही के बाद अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीएसए के सख्त निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है। क्या शिक्षकों की कार्यशैली में सुधार आएगा या फिर हालात जस के तस रहेंगे—यह आने वाला समय बताएगा।

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