चंदौली में सिल्ट और झाड़ियों से पटी माइनरों को साफ करने की मांग को लेकर धान की बुआई के मौसम में किसान पानी के लिए परेशान हैं।
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| ये हाल है पूर्वांचल में धान का कटोरा कहा जाने वाला जिला चंदौली का |
- एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोले - जांच के बाद कराई जाएगी सफाई
चंदौली: धान का कटोरा कहा जाने वाला जिले में कांग्रेस के जमाने से सिंचाई के लिए नहरों का बड़ा नेटवर्क होने के बावजूद, किसानों को अपनी धान की पौध तैयार करने के लिए पानी की एक-एक बूंद की सख्त जरूरत है। हालात ऐसे हैं कि समय पर सफाई और खुदाई न होने के कारण ज्यादातर छोटी सिंचाई नहरें कीचड़ और खरपतवार से भरी हुई हैं। नतीजतन, जब नहरों में पानी आता भी है, तो धान के खेतों तक उसका पहुंचना मुश्किल होता है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के कार्यकाल में सिंचाई नहरों का नेटवर्क बनाकर बंजर जमीन को सिंचाई लायक बनाने की कोशिश की गई थी, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी थी। लेकिन, सिंचाई नहरों और छोटी नहरों के रखरखाव में लापरवाही का असर अभी सिंचाई सिस्टम पर पड़ रहा है। बताया जाता है कि जब बरसात का समय आएगा तब नहरों व माइनरों की सफाई के नाम पर हर साल अधिकारी और ठेकेदार करोड़ों रूपये का बंदर बाँट कर लेंगे।
एक मात्रा उदाहरण देखें तो इलाके की कई नहरें, जिनमें बसरतिया-बसनी, जंसो की मड़ई, बाजितपुर, मोहब्बतपुर, देवढिल, दयालपुर, महरो, कोरी, पटपरा, कैली, कथौरी, महादेउल माइनर और धुस-नोनार, सकलडीहा , बढ़वल आदि माइनर और नहरें शामिल हैं,ये सिल्ट और झाड़ियों से अटी पड़ी हैं। किसानों का कहना है कि सफाई न होने से नहर के छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे धान की पौध तैयार करने और बाद में फसलों की सिंचाई करने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।
किसान प्रवीण यादव, धर्मेंद्र सोनी, सोनू तिवारी, बबलू ठाकुर, रवि यादव, उदयभान सिंह, बिरजू यादव और दशमी यादव समेत कई लोगों ने सरकार से नहर की तुरंत सफाई कराने की मांग की है।
सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रवि शंकर मिश्रा कहते हैं कि आमतौर पर नवंबर और दिसंबर में सरकारी स्तर पर नहर की बड़े पैमाने पर सफाई कराई जाती है। हालांकि, अभी जिन किसानों को दिक्कत हो रही है, उनका जूनियर इंजीनियर (JE) से निरीक्षण कराया जाएगा और ज़रूरी मशीनें लगाकर सफाई कराई जाएगी, ताकि किसानों को राहत मिल सके। यह कब होगा अभी पता नहीं , यही हाल रहा तो धान की नर्सरी देर होना तय है.

